Tuesday, April 20, 2010

चूहा बिलू रानी की कहानी




एक चूहा था नाम था बांके राव .बड़ाही चतुर .एक बार जब वो खेल रहा था तभी बिल्लो रानी हाँ हाँ वही जंगल के राजा की मौसीजी बिल्लिमोसी बांकेराव को देखते ही उसका मन चूहे को खाने का होने लगा .मुंह मे पानी आने लगा .बिल्लो बोलीवाह क्या चूहाहै मोटा तजा शानदार है आज तो पार्टी होजाय?अगर ये मेरे हाथ अजय तो .बिल्लो सोचने लगी पकडूँ कैसे ? चूहे ने बिल्लो को देख लिया था .उसने सोचा अगर भागता हूँ तो ये मुझे डरपोक समझेगी .चूहे ने जुगत लगाई उसने बिल्लो को अनदेखा किया और खेलते खेलते बिल के पास पहुंच गया और फिर खेलने लगा .बिल्लो ने देखा की मोका अच्छा है चूहे ने मुझे देखा नहीं है .अगर मे चुपचाप दबे पांव जाती हूँ तो उसको पता भी नहीं चलेगा ,वो चुपचाप धीरेधीरे चूहे की तरफ बढ़ने लगी चूहा भी कम नहीं था वो खेलते खेलते बिल्के पास तक पहुंच गया ,जेसे ही बिल्लो लपकती वो फट से बिल मे घुस गया .बिल्लो रानी खिसानी बिल्ली हो गई अब क्या करे मन तो पार्टी का बना लिया .उसने सोचा बिल के पासबैठा जायआयगा ही बाहर ,थोड़ी देर मे वह बौर होने लगी
बिल के पास जाकर बड़े प्यार से बोली --------
मुझं मझंदर बांकेराव
हम कथा कहें तुम बाहर आओ ।
चूहे ने भी प्यार से जवाब दिया ---------------
मोसी जी ,खोद्खाद कर किना मंदर [बिल ]
तुम कथा कहो हम सुने अन्दर ।
बिल्लो समझ गई की ये अंगूर तो खट्टे है हाथ अहि आने वाले चलो चलते है फिर किसी दिन देखेंगे
स्वाति दीदी

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