Saturday, April 24, 2010

पहला पूजन गणपति का क्यों?


प्यारे बच्चों , कल हमने चूहे की बात की थी आज उनकी बात करतेहै जो चूहे पेसवारी करते है चूहे की सवारी लेकर उनहोंने अपने माता पिता के चरणों की परिक्रमा करते हुए भगवन से सबसे पहले पूजे जाने का आशीर्वाद लिया था । तो सुनो बालक गणेश की कहानी
. भारतीय परंपरा में हर काम की शुरुआत में गणपति को पहले मनाया जाता है। शिक्षा से लेकर नए वाहन तक, व्यापार से लेकर विवाह तक हर काम में पहले गणपति को ही आमंत्रित किया जाता है। ऐसा कौन सा कारण है कि हम गणपति के बिना कोई काम नहीं कर सकते? आखिर किस कारण से गणपति को पहले पूजा जाता है?

गणपति को पहले पूजे जाने के पीछे बड़ा ही दार्शनिक कारण है, हम इसकी ओर ध्यान नहीं देते कि इस बात के पीछे संदेश क्या है। दरअसल गणपति बुद्धि और विवेक के देवता है। बुद्धि से ही विवेक आता है और जब दोनों साथ हों तो कोई भी काम किया जाए उसमें सफलता मिलना निश्चित है।

हम जब गणपति को पूजते हैं तो यह आशीर्वाद मांगते हैं कि हमारी बुद्धि स्वस्थ्य रहे और हम सही वक्त पर सही निर्णय लेते रहे ताकि हमारा हर काम सफल हो। इसके पीछे संदेश यही है कि आप जब भी कोई काम शुरू करें अपनी बुद्धि को स्थिर रखें, हर निर्णय को भलीभांति सोच-समझने और उसके दूरगामी परिणामों को ध्यान में रखकर ही लें तो सफलता अवश्य मिलेगी। दीदी[ भास्कर से साभार]

Tuesday, April 20, 2010

चूहा बिलू रानी की कहानी




एक चूहा था नाम था बांके राव .बड़ाही चतुर .एक बार जब वो खेल रहा था तभी बिल्लो रानी हाँ हाँ वही जंगल के राजा की मौसीजी बिल्लिमोसी बांकेराव को देखते ही उसका मन चूहे को खाने का होने लगा .मुंह मे पानी आने लगा .बिल्लो बोलीवाह क्या चूहाहै मोटा तजा शानदार है आज तो पार्टी होजाय?अगर ये मेरे हाथ अजय तो .बिल्लो सोचने लगी पकडूँ कैसे ? चूहे ने बिल्लो को देख लिया था .उसने सोचा अगर भागता हूँ तो ये मुझे डरपोक समझेगी .चूहे ने जुगत लगाई उसने बिल्लो को अनदेखा किया और खेलते खेलते बिल के पास पहुंच गया और फिर खेलने लगा .बिल्लो ने देखा की मोका अच्छा है चूहे ने मुझे देखा नहीं है .अगर मे चुपचाप दबे पांव जाती हूँ तो उसको पता भी नहीं चलेगा ,वो चुपचाप धीरेधीरे चूहे की तरफ बढ़ने लगी चूहा भी कम नहीं था वो खेलते खेलते बिल्के पास तक पहुंच गया ,जेसे ही बिल्लो लपकती वो फट से बिल मे घुस गया .बिल्लो रानी खिसानी बिल्ली हो गई अब क्या करे मन तो पार्टी का बना लिया .उसने सोचा बिल के पासबैठा जायआयगा ही बाहर ,थोड़ी देर मे वह बौर होने लगी
बिल के पास जाकर बड़े प्यार से बोली --------
मुझं मझंदर बांकेराव
हम कथा कहें तुम बाहर आओ ।
चूहे ने भी प्यार से जवाब दिया ---------------
मोसी जी ,खोद्खाद कर किना मंदर [बिल ]
तुम कथा कहो हम सुने अन्दर ।
बिल्लो समझ गई की ये अंगूर तो खट्टे है हाथ अहि आने वाले चलो चलते है फिर किसी दिन देखेंगे
स्वाति दीदी

Friday, April 16, 2010

Sunday, April 11, 2010



दीदी की बात सुनो
प्यारे बच्चों ,
तुम गर्मी की छुटी में नानाजी के घर जाते होना ? क्या आजकल नहीं जापाते हो ,ओह क्यूँ ?अच्छा समर कोर्स चलते हेंकोई बात नहीं ,हम यहीं से नानाजी के आँगन में रोज चलेगें एक नयी कहानी सुनने
ये वो कहानियां है ये आँगन तुम्हारे लिए खुला हे,जब तुम चाहो इसमे खेल सकते हो , कहानी कविता, चुटकुले
पहेलियों का मजा ले सकते हो , नानाजी के आँगन में कोई डर नहींकल हम नानाजी के आँगन में पहली बार एक साथं चलेगें और आँगन के बारे में विस्तार से जानेगें । मल्टीस्टोरी वाले घरों के आँगन गम हो गए हे ,जब में एक बार मुंबई गई तो आँगन तो दिखा ही नहीं .और एक बच्चे ने कहानी सुनकर मुझसे प्रश्न किया दीदी ये आँगन
क्या होता हे?तो आगे सुनो कहानी आँगन की=-------------- फिर आँगन में लगे नीम के पेड़ की -----फिर चूहे मियां की खूब कहानी ---------ये आँगन और इसकी कहानी तुम्हे केसी लगी ये जरुर बताना , ओके
चलो कल मिलेगें नानाजी के आँगन में बाय बाय ----बाय तुम्हारी दीदी स्वाति